अल्सर के रोगी को क्या खाना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Sat 3rd Dec 2022 : 16:20

पेट के अल्सर में क्या खाएं

यहां हम उन खाद्य पदार्थों के बारे में बता रहे हैं, जिनका सेवन पेट में अल्सर की समस्या से बचाव या उनके लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है। साथ ही हम यह स्पष्ट कर देते हैं कि यहां बताए गए खाद्य पदार्थ को किसी भी पेट में अल्सर का डॉक्टरी इलाज न समझें। यह समस्या गंभीर न हो इसलिए डॉक्टरी इलाज को प्राथमिकता दें और उसके साथ यहां बताए गए खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें।
1. फूलगोभी

फूलगोभी का उपयोग अल्सर की समस्या में किया जा सकता है। इस विषय से जुड़े एक शोध में बताया गया है कि फूलगोभी में इंडोल-3-कार्बिनोल नामक फाइटोकेमिकल मौजूद होता है जो एंटी अल्सर गतिविधि प्रदर्शित कर सकता है (2)। इसका यह गुण अल्सर की समस्या में बचाव कर सकता है।

वहीं, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध की मानें तो पेप्टिक अल्सर की समस्या में फूल गोभी का सेवन कर तो सकते हैं, लेकिन सावधानी के साथ सेवन किया जाना चाहिए (3)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि अल्सर की समस्या में फूलगोभी का सेवन करना फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, इसमें सावधानी के बारे में भी कहा गया, इसलिए बेहतर है कि अल्सर के दौरान इसके सेवन से पहले डॉक्टरी सलाह ली जाए। वहीं, अल्सर के जोखिम को कम करने के लिए फूलगोभी को डाइट में शामिल किया जा सकता है।
2. पत्ता गोभी

पत्ता गोभी का इस्तेमाल अल्सर की समस्या से बचाव में मदद कर सकता है। दरअसल, पत्ता गोभी के जूस में एंटीपेप्टिक अल्सर गुण मौजूद होते हैं, जो अल्सर के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। इस बात की पुष्टि के लिए अल्सर की समस्या से पीड़ित जानवरों को पत्ता गोभी के जूस का सेवन कराया गया। फिर पाया गया कि पत्ता गोभी का रस पेप्टिक अल्सर के तेजी से उपचार में मदद कर सकता है (4)।

वहीं, फूलगोभी की तरह ही पत्ता गोभी को भी अल्सर की समस्या में सावधानी के साथ सेवन करने की सलाह दी जाती है (3)। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि अल्सर से बचाव के लिए पत्ता गोभी का सेवन कर सकते हैं। वहीं, अल्सर की समस्या से पीड़ित व्यक्ति इसके सेवन से पहले इसकी मात्रा से जुड़ी और सावधानियों की जानकारी के बारे में डॉक्टर से सलाह ले लें।
3. मूली

अल्सर डाइट चार्ट में मूली को शामिल करना भी फायदेमंद हो सकता है। एक रिसर्च में इस बात की जानकारी मिलती है कि मूली में एंटी अल्सर प्रभाव मौजूद होते हैं, जो शराब के अधिक सेवन से होने वाले गैस्ट्राइटिस और गैस्ट्रिक अल्सर के उपचार में प्रभावी साबित हो सकते हैं (5)। ऐसे में दवा के साथ-साथ अल्सर के लिए आहार में मूली का उपयोग लाभकारी माना जा सकता है।
4. सेब

पेट के अल्सर की समस्या से राहत पाने के लिए सेब का सेवन करना भी फायदेमंद माना जा सकता है। बता दें कि सेब पॉलीफेनॉल्स से समृद्ध होता है, जो एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य कर सकता है। इसके अलावा, सेब में गैस्ट्रो प्रोटेक्टिव प्रभाव भी होता है, जो एस्पिरिन की दवा के वजह से होने वाले गैस्ट्रिक अल्सर को कम कर सकता है।

यही नहीं, सेब में एंटी हेलिकोबैक्टर पाइलोरी प्रभाव भी होते हैं, जो हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) नामक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद कर सकते हैं। बता दें कि यह बैक्टीरिया पेप्टिक अल्सर का एक कारण माना जाता है (6)।
5. ब्लूबेरी

अल्सर के उपचार के लिए ब्लूबेरी का भी सेवन किया जा सकता है। ‘पेप्टिक अल्सर के घरेलू उपचार’ से जुड़ी एक जानकारी में बताया गया है कि ब्लूबेरी पॉलीफेनोल नामक एंटीऑक्सीडेंट से समृद्ध होता है, जो अल्सर से बचाव करने में और अल्सर की समस्या में होने वाले घाव को भरने या कम करने में मदद कर सकते हैं (7)।

इसके अलावा, ब्लूबेरी और उसके अर्क में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया को पनपने से रोकने की क्षमता होती है (8)। जैसा कि हमने लेख में बताया है कि हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया को अल्सर का एक जोखिम कारक माना गया है (1)। इस आधार पर अल्सर के लिए आहार में ब्लूबेरी को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
6. रास्पबेरी

एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध की मानें तो रास्पबेरी फल के साथ-साथ उसके रस और अर्क सभी में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया के संक्रमण को फैलने से रोकने की क्षमता होती है (8)। ऐसे में यह माना जा सकता है कि अल्सर से बचाव के लिए रास्पबेरी का सेवन करना भी लाभकारी साबित हो सकता है।
7. ब्लैक बेरी

स्वास्थ्य के लिहाज से ब्लैक बेरी भी बेहद गुणकारी फल माना जाता है। इसपर हुए एक शोध से जानकारी मिलती है कि ब्लैक बेरी का उपयोग अल्सर की समस्या से बचाव के लिए किया जाता रहा है (9)। दरअसल, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध की मानें तो ब्लैक बेरी और उसके अर्क दोनों में ही हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया को पनपने से रोकने की क्षमता होती है (8)।

वहीं, लेख में हम यह बता ही चुके हैं कि हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया को पेप्टिक अल्सर का एक प्रमुख कारण माना गया है (1)। ऐसे में ब्लैक बेरी का उपयोग अल्सर की समस्या के लिए फायदेमंद माना जा सकता है।
8. स्ट्रॉबेरी

स्ट्रॉबेरी खाने में जितनी स्वादिष्ट होती है, स्वास्थ्य के लिए भी उतनी ही लाभकारी मानी जाती है। इन लाभों में अल्सर से बचाव भी शामिल है। दरअसल, स्ट्रॉबेरी में अल्सर का कारण बनने वाले हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया को पनपने से रोकने की क्षमता होती है। स्ट्रॉबेरी फल के अलावा, उसका रस और अर्क भी इस बैक्टीरिया के प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है (8)। यही वजह है कि स्ट्रॉबेरी को अल्सर डाइट में शामिल करना अच्छा विकल्प माना जा सकता है।
9. चेरी

अल्सर की समस्या में चेरी के सेवन की भी सलाह दी जा सकती है। इससे संबंधित एक रिसर्च से जानकारी मिलती है कि चेरी फल में फ्लेवोनोइड्स और एंथोसायनिडिन एवं रेस्वेराट्रोल जैसे एंटीऑक्सिडेंट मौजूद होते हैं, जो अल्सर का कारण बनने वाले हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया को पनपने से रोकने में मदद कर सकते हैं (10)। इस आधार पर अल्सर डाइट में चेरी को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
10. शिमला मिर्च

अल्सर डाइट के रूप में शिमला मिर्च का भी सेवन किया जा सकता है। इससे जुड़े एक शोध से जानकारी मिलती है कि शिमला मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन एंटी अल्सर प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है। साथ ही यह पेट के अल्सर का कारण बनने वाले हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया के खिलाफ भी प्रभावकारी हो सकता है (11)।

वहीं, एनसीबीआई की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च में लाल शिमला मिर्च को अल्सर की समस्या में सावधानी के साथ खाए जाने वाली खाद्य पदार्थों की लिस्ट में शामिल किया गया है (3)। इन तथ्यों के आधार पर अल्सर में क्या खाना चाहिए, इसके जवाब के रूप में सावधानीपूर्वक शिमला मिर्च के सेवन की सलाह दी जा सकती है। अगर मन में दुविधा हो तो इस बारे में डॉक्टरी सलाह जरूर लें।
11. गाजर

मूली की तरह गाजर का सेवन भी अल्सर की समस्या से बचाव में मददगार साबित हो सकता है। बताया जाता है कि शराब के अधिक सेवन से होने वाले गैस्ट्राइटिस और गैस्ट्रिक अल्सर की समस्या में गाजर में मौजूद एंटी अल्सर गुण प्रभावकारी रूप से काम कर सकते हैं (5)। इसके अलावा, एक अन्य शोध में बताया गया है कि गाजर का अर्क भी गैस्ट्रिक अल्सर से बचाव में मददगार साबित हो सकता है (12)।
12. ब्रोकली

ब्रोकली का उपयोग कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभों के लिए किया जाता है। इन लाभों में अल्सर से बचाव भी शामिल है। इस बात की जानकारी ब्रोकली के गुणों पर हुए एक शोध से मिलती है। इस शोध में बताया गया है कि ब्रोकली और अंकुरित ब्रोकोली दोनों में ही सल्फोराफेन मौजूद होता है, जो पेट के अल्सर का कारण बनने वाले हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया को पनपने से रोकने में मदद कर सकता है (13)।

हालांकि, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में अल्सर की समस्या के दौरान सावधानी के साथ ब्रोकली के सेवन की सलाह भी दी गई है (3)। इस आधार पर गैस्ट्रिक अल्सर में क्या खाना चाहिए, इस सवाल के जवाब के रूप में सावधानी के साथ ब्रोकली के सेवन की सिफारिश की जा सकती है।
13. हरी पत्तेदार सब्जी

पेट के अल्सर के लिए डाइट में हरी पत्तेदार सब्जी, जैसे – पालक, केल आदि को शामिल किया जा सकता है (3)। बताया जाता है कि पालक में एंटी अल्सर गुण मौजूद होते हैं, जो अल्सर की समस्या को कम करने में कारगर साबित हो सकते हैं (14)।

इसके अलावा, केल के पत्ते का सेवन भी अल्सर की समस्या में लाभकारी माना जा सकता है। दरअसल, केल के पत्ते में फ्लेवोनॉयड्स और स्टेरोल्स नामक दो फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जो एंटी अल्सर गुण प्रदर्शित करने के लिए जाने जाते हैं (15)।
14. प्रोबायोटिक फूड्स

पेप्टिक अल्सर के लिए प्रोबायोटिक्स को भी लाभकारी माना जा सकता है। बताया जाता है कि प्रोबायोटिक्स एंटीबायोटिक दवाओं के दुष्प्रभावों को कम कर अल्सर के उपचार में सहायक हो सकते हैं (3)। यहां हम कुछ प्रोबायोटिक फूड्स के बारे में बता रहे हैं, जिनका सेवन अल्सर की समस्या में लाभकारी माना जाता है:

दही – जैसा कि हमने लेख में बताया कि हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया को पेप्टिक अल्सर का एक प्रमुख कारण माना जाता है (1)। वहीं, दही में इस बैक्टीरिया के संक्रमण को रोकने की क्षमता होती है (16)। यही वजह है कि अल्सर के लिए आहार में दही के उपयोग की सलाह दी जाती है।
केफिर – एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध की मानें तो केफिर में भी हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया को पनपने से रोकने की क्षमता होती है (15)। बता दें कि केफिर दूध को किण्वित करके बनाया जाता है। यह देखने में दही जैसा ही लगता है।
मिसो – मिसो, सोयाबीन को किण्वित करके बनाया जाता है। इस पर हुए शोध से पता चलता है कि गैस्ट्रिक अल्सर से बचाव के लिए इसका सेवन करना फायदेमंद साबित हो सकता है (17)। इस आधार पर अल्सर में क्या खाना चाहिए, इस सवाल के जवाब के रूप में मिसो के सेवन की सलाह दी जा सकती है।
सॉवरक्रॉट – सॉवरक्रॉट (Sauerkraut), पत्ता गोभी को किण्वित करके बनाया जाता है। इससे जुड़े एक रिसर्च से जानकारी मिलती है कि सॉवरक्रॉट में एंटी-हेलिकोबैक्टर गतिविधि मौजूद होती है, जो हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया को पनपने से रोकने में मदद कर सकता है (15)। इस आधार पर अल्सर डाइट चार्ट में सॉवरक्रॉट को भी शामिल करने की सलाह दी जा सकती है।
कोम्बुचा टी : कोम्बुचा चाय की बात करें तो इसमें भी हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया के विकास को रोकने की क्षमता होती है। वहीं, इसके पीछे इसके एंटी माइक्रोबियल गुण को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। यही नहीं, इस पर हुए शोध में यह भी बताया गया है कि इस चाय में गैस्ट्रिक अल्सरेशन के खिलाफ हीलिंग गुण भी मौजूद होते हैं। यह अल्सर के घाव को भरने में मदद कर सकता है (18)। ऐसे में पेट के अल्सर के लिए डाइट में कोम्बुचा चाय को भी शामिल किया जा सकता है।

15. ऑलिव ऑयल

स्वास्थ्य के लिए ऑलिव के इस्तेमाल को भी लाभकारी माना गया है। दरअसल, इसमें ऐसे कई फेनोलिक कंपाउंड होते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इनमें पेप्टिक अल्सर की समस्या से बचाव भी शामिल है। इस बारे में एनसीबीआई की वेबसाइट पर एक शोध प्रकाशित है, जिसमें बताया गया है कि ऑलिव ऑयल पेप्टिक अल्सर का कारण बनने वाले हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया के खिलाफ मजबूती से लड़ सकता है (19)। हालांकि, इस विषय में अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।
16. शहद

अल्सर में क्या खाना चाहिए, इस सवाल की लिस्ट में शहद को भी शामिल किया जा सकता है। बता दें कि शहद में एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं, जो पेप्टिक अल्सर का कारण बनने वाले हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया से लड़ने में मदद कर सकता है (20)।

इसके अलावा, एक अन्य शोध में मनुका शहद में मौजूद फ्लेवोनोइड को भी एंटी-अल्सरोजेनिक गुण के लिए जिम्मेदार माना गया है, जो अल्सर की समस्या से बचाव कर सकता है (21)। इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि शहद का इस्तेमाल अल्सर डाइट के रूप में किया जा सकता है।
17. लहसुन

पेट के अल्सर के लिए लहसुन का सेवन भी फायदेमंद साबित हो सकता है। पेप्टिक अल्सर के उपचार में हर्बल दवाइयों के उपयोग पर हुए एक शोध में बताया गया है कि लहसुन में एंटी बैक्टीरियल और एंटी माइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं, जो हेलिकोबैक्टर पाइलोरी को पनपने से रोकने में मदद कर सकते हैं (22)। वहीं, लेख में हम बता ही चुके हैं कि हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया को पेप्टिक अल्सर का एक प्रमुख कारण माना गया है।
18. डिकैफिनेटेड ग्रीन टी

पेट के अल्सर में क्या खाना चाहिए, इस सवाल के जवाब में ग्रीन टी के सेवन की भी सलाह दी जा सकती है। इस बारे में एनसीबीआई की वेबसाइट पर एक शोध प्रकाशित है, जिसमें यह बताया गया है कि डिकैफिनेटेड ग्रीन टी में एपिगैलोकैटेचिन गैलेट नामक पॉलीफेनोल मौजूद होता है, जो एंटी-अल्सर गुण प्रदर्शित करने के लिए जाना जाता है (23)। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अल्सर के लिए आहार की लिस्ट में सीमित मात्रा में डिकैफिनेटेड ग्रीन टी को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
19. मुलेठी

एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश रिसर्च की मानें तो मुलेठी का इस्तेमाल भी अल्सर के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। बताया जाता है कि मुलेठी पेट के बलगम के स्राव को बढ़ा सकती है। इससे अल्सर को बनने से रोकने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, मुलेठी में एंटी हेलिकोबैक्टर पाइलोरी प्रभाव भी पाया गया है, जो अल्सर का कारण बनने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार साबित हो सकता है (24)।
20. हल्दी

त्वचा के लिए तो हल्दी के फायदे हैं ही इसके अलावा, स्वास्थ्य के लिए भी यह गुणकारी माना जाता है। वजह है इसमें मौजूद करक्यूमिन नामक कंपाउंड, जो कई प्रकार के औषधीय गुण से समृद्ध होता है। इसमें एंटी-अल्सर प्रभाव भी शामिल है। इस बात की पुष्टि एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध से होती है (25)। इस आधार पर हम यह कह सकते हैं कि गैस्ट्रिक अल्सर में क्या खाना चाहिए, इस सवाल के जवाब में हल्दी के उपयोग की सिफारिश की जा सकती है।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
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